यूरोप, चीन, हॉन्ग कॉन्ग, जापान और भारत मिलकर भी नहीं कर सकते इस देश का मुकाबला

 

चीन दुनिया की दूसरी बड़ी इकॉनमी है। भारत चौथे और जापान पांचवें नंबर पर है। यूरोपीय देशों की इकॉनमी भी काफी आगे है। हॉन्ग कॉन्ग भी दुनिया के अमीर देशों में आता है। लेकिन ये सारे देश मिलकर भी एक देश का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। जानिए क्या है मामला...

Equity market
अमेरिका का इक्विटी मार्केट पांच साल में दोगुना हो गया है। (फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का कारण पूरी दुनिया में उथलपुथल है। आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है क्योंकि इस पर रोक की अवधि 9 जुलाई को खत्म हो रही है। लेकिन अमेरिका का शेयर बाजार लगातार बड़ा होता जा रहा है। यह कितना बड़ा है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह यूरोप, चीन, हॉन्ग कॉन्ग, जापान और भारत के कंबाइंड मार्केट से भी बड़ा है। पिछले पांच साल में अमेरिका का इक्विटी मार्केट दोगुना हो चुका है।

गोल्डमैन सैश के मुताबिक अमेरिका का इक्विटी मार्केट 63.8 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। यह यूरोप के कुल मार्केट से तीन गुना से भी ज्यादा बड़ा है। दूर-दूर तक कोई इसकी टक्कर में नहीं है। यूरोप का इक्विटी मार्केट 18.8 ट्रिलियन डॉलर है जबकि चीन और हॉन्ग कॉन्ग 17.2 ट्रिलियन डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर हैं। जापान के इक्विटी मार्केट की वैल्यू 7 ट्रिलियन डॉलर है जबकि भारत 5.3 ट्रिलियन के साथ इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर हैं।

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कौन-कौन हैं टॉप में

ब्रिटेन का इक्विटी मार्केट 3.5 ट्रिलियन डॉलर का है जबकि फ्रांस 3.3 लाख करोड़ रुपये के साथ सातवें, जर्मनी (3 ट्रिलियन डॉलर) आठवें, स्पेन (1 ट्रिलियन डॉलर) नौवें, इटली (1 ट्रिलियन डॉलर) दसवें, ब्राजील 11वें (0.7 ट्रिलियन डॉलर), मेक्सिको (0.4 ट्रिलियन डॉलर) 12वें और साउथ अफ्रीका (0.4 ट्रिलियन डॉलर) 13वें नंबर पर है। अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। उसके बाद चीन, जर्मनी, भारत और जापान का नंबर है।

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