देश में मिलेंगी 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां, केंद्र ने दी 99446 करोड़ रुपये की ELI स्‍कीम को मंजूरी

 

ELI Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इसमें कई अहम फैसले लिए गए। इनमें देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 99,446 करोड़ रुपये की रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना भी शामिल है। इससे अगले दो साल में 3.5 करोड़ से अधिक जॉब्स मिलने की उम्मीद है।

ELI Scheme
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) (फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)
नई दिल्ली: सरकार ने देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 99,446 करोड़ रुपये की रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इससे दो साल में 3.5 करोड़ जॉब्स पैदा होने की उम्मीद है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने 99,446 करोड़ रुपये की ELI योजना को भी मंज़ूरी दी है। ELI का मतलब है एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव। इस योजना का मकसद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नौकरियां पैदा करना है। इस योजना से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा जहाँ नौकरी मिलने की संभावना ज्यादा है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के तहत 3.5 करोड़ से ज्यादा नौकरियां पैदा करना है।

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RDI योजना को भी मंजूरी

उन्होंने बताया कि सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये की RDI योजना को मंजूरी दी है। RDI का मतलब है रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन। इस योजना से देश में नई खोजों को बढ़ावा मिलेगा। इससे भारत में चीजें बनाने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, भारत का नाम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे आएगा। सरकार ने इस योजना को बनाने से पहले इजराइल, अमेरिका, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों के मॉडल को भी देखा था।

सरकार ने RDI योजना के तहत कुछ खास क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही है। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, साफ़ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और स्पेस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा, खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल भी शामिल है। बायोटेक्नोलॉजी, बायोमैन्युफैक्चरिंग, सिंथेटिक बायोलॉजी, दवाइयां और मेडिकल डिवाइस भी इस योजना का हिस्सा हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, डिजिटल खेती और देश को आत्मनिर्भर बनाने वाली टेक्नोलॉजी पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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